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भारतीय परिवहन व्यवस्था की यात्रा का संक्षिप्त विवरण

रोज़मर्रा देश की सड़कों पर हजारों गाड़ियां यहाँ से वहाँ सामान को लेकर दौड़ती हैं । कहते हैं की एक पूरा भारत रोज़ सड़कों पर यहाँ से वहाँ दौड़ता है। पर जब हम अपने सामान को कहीं ले कर जाना चाहते हैं तो अक्सर परेशान होते हैं की किस को चुने और क्यूँ । आज हम आपको भारतीय परिवहन उद्योग के बदलते स्वरूप के बारे मे बता रहें हैं । और साथ ही अपने लिए सही पैकर एंड मूवर का चयन कैसे करे ये भी बता रहें हैं |

भारतीय ट्रांसपोर्ट उद्योग लगातार 15 प्रतिशत की दर से बड़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 7 करोड़ गाड़िया रोज़ केवल सामान ढोने के लिए देश की सड़कों पर दौड़ रही हैं  और आने वाले 2025 तक इसके कई गुना बड़ जाने का अनुमान है । हम अपनी जीडीपी का 14 प्रतिशत परिवहन के संसाधनो पर व्यय करते हैं । जबकि अन्य देशो मे इसका प्रतिशत 6-8  है। इन सबके बावजूद आज भी ये उद्योग संगठित ओर सुगठित नहीं है और सुलभ साधन उपलब्ध न होने की वजह से आज भी  इस उद्योग मे कई समस्याए हैं। 

भारतीय ट्रांसपोर्ट उद्योग

आइये आज हम इंडियन ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री को बेहतर तरीके से जानने की कोशिश करते हैं । क्यूंकी किसी भी समस्या को समझने से पहले उस क्षेत्र को बेहतर तरीके से जानना आवश्यक होता है तो हम आज इसके सभी पहलुओं पर एक नज़र डालते हैं ।

इंडियन ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री ब्रोकर दलाल (दलाल ) :-

इंडियन ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री ब्रोकर दलाल (दलाल )

ये वो लोग होते हैं जो आपूर्ति पक्ष से की ओर से होते हैं और सामान्यतः स्थानीय होते हैं इनका काम होता है की ये एक ग्राहक को ये विश्वास दिलाये की उसका सामान सही प्रकार बिना किसी हानि के उस तक पहुंचेगा और आपूर्ति पक्ष को इस बात का विश्वास दिलाये की सामान पहुंचाने के बाद गाड़ी सही सलामत वापस लौट कर आएगी । भारत मे कई लौग इस प्रकार का कार्य करते हैं जो सामान्यतः रोज़ 100 के आसपास मालवाहक गाड़ियों का संचालन नियंत्रित करते हैं । क्यूंकी एक ट्रांसपोरटर या ट्रांसपोर्ट के लिए एक साथ सारी जगह से निगरानी कर पाना संभव नहीं हो पाता । ऐसे मे ये ब्रोकर ही होते हैं जो इंडियन ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री मे एक महत्वपूर्ण भाग का प्रतिनिधित्व करते हैं ।

ट्रांसपोरटर या वाहन मालिक :-

वाहन मालिक का मुख्य उद्देश्य है की वो अपने वाहन का अधिकतम उपयोग सुनश्चित करे । अगर एक दिन भी उसका वाहन कार्य पर नहीं जाता तो इसके लिए उसे नुकसान उठाना पड़ता है ।

इसके साथ ही वाहनो के उचित रखरखाव भी एक महत्वपूर्ण कार्य है । साथ ही माल को सही समय तक भेजने का दवाब भी होता है । विशेष रूप से लंबी दूरियों के परिवहन मे । हमारे देश की ट्राफिक व्यवस्था भी अपने आप मे एक बड़ी चुनौती है । इसके साथ ही देश मे आज भी 80 प्रतिशत से अधिक ऐसे ट्रांसपोरटर हैं जिनके पास 10 से कम वाहन हैं ऐसे मे मध्यस्थ की आवश्यकता उत्पन्न होती हैं क्यूंकी ये क्षेत्र आज भी काफी विखंडित है ।  

अपने माल को  ढोने के लिए किसी वाहन का चयन आसान प्रक्रिया नहीं है , इसमे कई संस्थाए शामिल होती हैं । जब आपको अपने माल को नियत समय पर कहीं भेजना होता है तो आप के लिए समय एक महत्वपूर्ण  कारक होता है आप उसी वाहन का चयन करेंगे जो आपको सुनिश्चितता के साथ समय   पर

डिलेवेरी का आश्वाशन देगा ऐसे मे ही दलाल एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बनकर उभरते हैं जो शिपर  और आपके बीच कड़ी का काम करते हैं और आपकी ज़रूरत के अनुसार उचित दाम पर आपके लिए वाहन सुलभ करवाते हैं यही कार्न हैं की इंडियन ट्रांसपोर्ट मे आज भी विसंगती हैं क्यूंकी यहाँ किसी काम का दाम निश्चित नाही है ।

ट्रांसपोर्ट मार्केट किस प्रकार संचालित होता है ?

ट्रांसपोर्ट मार्केट किस प्रकार संचालित होता है

भारत के ट्रांसपोर्ट मार्केट की शुरुआत दिन निकालने के साथ ही हो जाती है  शिपर अपने पास उपलब्ध वाहनो की सूची जारी करते हैं ताकि  अगले दिन के लिए वाहन मे सामान लादा जा सके । इसके साथ ही जिन वाहनो मे सामान लदा है उनको खाली करवाने की प्रक्रिया  भी चालू हो जाती है ताकि अगले दिन के लिए उनकी उपलब्धत्ता निश्चित की जा सके । यहाँ मांग  और पूर्ति का नियम काम करता है । जैसे कई बार एक ही मार्ग पर वाहनो की बुकिंग अधिक आती है इसका मतलब है की उस मार्ग पर वाहन की मांग अधिक है  तो उसके अनुसार उस मार्ग पर शुल्क भी बढ़ जाता है । शाम 5 बजे तक सभी उपलब्ध वाहनो की बूकिंग खुली रहती है । एक बार सारे सहमति पत्र और औपचारिकताए पूरी हो जाये तो वाहन पर सामान लादना प्रारम्भ हो जाता है ।

भारत मे परिवहन उद्योग :- 

भारत मे परिवहन उद्योग

भारत एक विकास शील देश है । यहाँ उद्योगों का विस्तार लगातार हो रहा है उसी दर से  तैयार माल को सही समय पर उपलब्ध करवाना और कच्चे माल को सही समय पर उद्योग को उपलब्ध करवाना भी एक अत्यंत ही कठिन कार्य है हमारे भारत के शिपर लगातार इस कार्य के लिए मुस्तैद हैं । परंतु विषम परिसतिथियों मे भी हर मौसम और कठिन हाल मे भी उद्योगो को माल की उपलब्धत्ता करवाना एक अत्यंत ही कठिन कार्य है । 

इंडियन ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री  मे तकनीक का प्रयोग :-

Indian transportation industry

आजकल तकनीक का ज़माना है हर चीज़ मे तकनीक का इस्तेमाल होता है भारतीय परिवहन उद्योग भी इससे अछूता नहीं है । आज कल कई ऐसी तकनीक आ गई हैं जिनके माध्यम से किसी भी परिवहन के लिए वाहन की बूकिंग आसान हो गई है । आज आप घर बैठे आराम से अपने फोन से वाहन की उपलब्धत्ता और सही शुल्क पता कर सकते हैं । इससे दलालो को दिया जाने वाला शुल्क भी बच जाता है । इसके साथ ही अगर आप ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं तो आप अपने सभी वाहनो का मार्ग और अन्य गतिविधियों पर नज़र रख सकते है। इसके साथ ही आप  पैसो के लेनदेन को भी आसानी से कर सकते हैं । इस प्रकार तकनीक के माध्यम से आप सीधे अपने ग्राहक से जुड़ सकते हैं और उनकी जरूरतों को समझकर उन्हे उचित सुविधाएं उपलब्ध करा सकते हैं ।

आजकल ऐसी एप और वैबसाइट उपलब्ध हैं जहां आप अपने शहर मे मौजूद सभी ट्रांसपोरटर और पैकर एंड मूवर की जानकारी देख सकते हैं । और अपनी सुविधा के अनुसार कोई भी पैकर और मूवर को चुन सकते हैं ।

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